वेनेजुएला के कैंसर ग्रस्त राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज और उनके करीबी निकोलस मादुरो लोगों के सामने टीवी स्क्रीन पर आए। चावेज 2 महीने पहले ही हेनरिक कैप्रिल्स को हराकर चौथी बार वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने थे। चुनाव के दौरान उन्होंने कैंसर की बात छिपाई थी।
टीवी पर उन्होंने संविधान की एक प्रति हाथों में लहराते हुए जनता से कहा, ‘मेरा कैंसर वापस आ गया है और पूर्णिमा के चांद की तरह मेरी बिल्कुल साफ, अटल और दृढ़ सलाह है कि आप निकोलस को राष्ट्रपति चुनें। मैं आपसे दिल से अनुरोध कर रहा हूं, अगर मैं नहीं रहा, तो सिर्फ निकोलस उन युवा लीडर्स में से एक हैं, जिनमें सत्ता संभालने की अपार क्षमता है।’
3 महीने बाद ही चावेज की मौत हो गई और मादुरो अगले राष्ट्रपति बन गए। जबकि राष्ट्रपति पद की लाइन में चावेज के दामाद तक थे। अब 12 साल सत्ता में रहने के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी सैनिक कल राजधानी कराकस से उठा लाए हैं। उन पर अमेरिका कैदी की तरह मुकदमा चलाएगा। आखिर एक मामूली बस ड्राइवर से वेनेजुएला के ‘अजेय राष्ट्रपति’ कैसे बने मादुरो, क्या वाकई खतरनाक ड्रग कार्टेल चलाते थे, कैसे बने अमेरिका के दुश्मन, जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में…

1960 का दशक। इस समय अगर अमेरिका का हर व्यक्ति औसतन 100 रुपए कमाता, तो वेनेजुएला का हर व्यक्ति 82 रुपए कमाता था। तेल उत्पादन ने वेनेजुएला को इतना अमीर देश बना दिया था कि उसे ‘लैटिन अमेरिका का सऊदी अरब’ कहा जाने लगा था।
इसी दौर में वेनेजुएला की राजधानी कारकस में 13 नवंबर 1962 को निकोलस मादुरो का जन्म हुआ। बाहर से वेनेजुएला की जो चकाचौंध दिखती थी, अंदर की हकीकत उससे काफी अलग थी। तेल से होने वाली कमाई सिर्फ ऊंचे तबके को मिल पाती, देश के ज्यादातर लोग बेहद गरीब थे।
मादुरो के पिता जीसस निकोलस वर्कर्स के ट्रेड यूनियन के लीडर थे। मां टेरेसा हाउस वाइफ थीं, जो वेनेजुएला के ही पड़ोसी देश कोलंबिया की रहने वाली थीं। यहीं उनकी शादी जीसस निकोलस से हुई और दोनों वेनेजुएला आ गए। आगे चलकर ये बात मादुरो के राजनीतिक करियर का एक बड़ा रोड़ा बनने वाली थी।
रॉक म्यूजिक और बेसबॉल के अलावा बचपन से ही मादुरो का एक और इंट्रेस्ट था- पॉलिटिक्स।

मादुरो ने हाईस्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। 21 साल की उम्र में वह वेनेजुएला के लेफ्ट लीडर रहे जोस विसेंट रेंगल के बॉडीगार्ड बन गए। इसके बाद उन्होंने बस चलाना शुरू कर दिया। वो आगे चलकर ट्रेड यूनियन लीडर भी बने।
1980 के दशक में मादुरो ने क्यूबा जाकर पॉलिटिकल स्टडीज का कोर्स किया। यहां लैटिन अमेरिका के वामपंथी नेताओं को शिक्षा दी जाती थी। उनके राजनीतिक विरोधी आरोप लगाते हैं कि क्यूबा में रहने के दौरान वहां की इंटेलिजेंस एजेंसी ने मादुरो को बतौर एजेंट काम पर रखा था।
यह वह दौर था, जब तेल के दाम गिरने की वजह से वेनेजुएला में आर्थिक अस्थिरता आ गई थी। इसके खिलाफ ह्यूगो चावेज ने क्रांति शुरू की, जो आगे चलकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति और मादुरो के गुरु बने।
1992 में चावेज ने वेनेजुएला में सत्ता पलटने की कोशिश की, लेकिन नाकामयाब हुए। इस समय तक मादुरो भी उनके संपर्क में आ चुके थे। 1999 में चावेज वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने और इसके अगले ही साल मादुरो भी वेनेजुएला की नेशनल असेंबली के मेंबर बन गए।

धीरे-धीरे मादुरो चावेज के भरोसेमंद बनते चले गए। वो 2005 में वेनेजुएला की नेशनल असेंबली के प्रमुख बने और फिर 2006 में चावेज ने उन्हें अपना विदेश मंत्री बनाया।
इसी समय एक बार उनका भारत आना हुआ। किसी राजनीतिक यात्रा पर नहीं, लेकिन अपने गुरु का आशीर्वाद लेने। निकोलस मादुरो सत्य साईं बाबा को अपना गुरु मानते थे। 2005 में वो आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में ‘प्रशांति निलयम आश्रम’ दर्शन के लिए आए थे।

मादुरो ने सत्य साईं बाबा के पैरों के पास बैठकर उनसे आशीर्वाद लिया। उनके साथ भारत आई साथी राजनेता सीलिया फ्लोरेस अब उनकी पत्नी हैं।
मादुरो के करीबी बताते हैं कि सत्य साईं बाबा की एक बड़ी तस्वीर उनके ऑफिस पर भी लगी थी। 2011 में जब सत्य साईं बाबा की मृत्यु हुई थी, तब वेनेजुएला ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। इस समय मादुरो विदेश मंत्री थे। नवंबर में सत्य साईं की 100वीं सालगिरह पर उन्होंने एक मैसेज जारी किया था, ‘मुझे हमेशा उनकी मुलाकात याद आती है… महान गुरु का ज्ञान हमें हमेशा रोशन करता रहे।’
मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस भी चावेज की करीबी थीं, वह आंदोलन के दिनों में मादुरो से मिली थीं। सीलिया पेशे से वकील थीं और मादुरो सहित दूसरे नेताओं का कानूनी बचाव करती थीं। बाद में वह सत्य साईं बाबा की भक्त बन गईं।दोनों ने अपने-अपने पार्टनर से तलाक लेकर 2013 में शादी की थी। आगे चलकर सीलिया वेनेजुएला की अटॉर्नी जनरल भी बनीं। मादुरो की राजनीति में सीलिया एक्टिव रहती हैं। उन्हें वेनेजुएला में ‘फर्स्ट लेडी’ नहीं बल्कि ‘फर्स्ट कॉम्बैटेंट’ यानी ‘पहली लड़ाकू’ कहा जाता है।

जून 2011 में चावेज को अपने कैंसर का पता चला। चावेज कहते थे कि उन्होंने अपनी सेहत के साथ बहुत लापरवाही की। वो देर रात तक जागते थे और दिन में 40 कप कॉफी पीते थे। क्यूबा में चावेज की कीमोथेरेपी शुरू हुई। उनके सिर के बाल चले गए, पेल्विक सर्जरी की गई, लेकिन उन्होंने ये कभी नहीं बताया कि उन्हें कौन सा कैंसर था।
2012 में राष्ट्रपति पद के चुनाव होने थे। चावेज की पार्टी पार्टिडो सोशलिस्टा यूनिडो डी वेनेज़ुएला यानी PSUV ने चावेज को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया। इस दौरान चावेज ने झूठ कहा कि डॉक्टर्स ने कहा है कि उनका कैंसर अब पूरी तरह खत्म हो गया है। वह नहीं चाहते थे कि उनकी बीमारी के चलते उनके प्रतिद्वंद्वी हेनरिक कैप्रिल्स चुनाव जीत जाएं।
7 अक्टूबर को चुनाव हुआ, वेनेजुएला की नेशनल इलेक्शन काउंसिल ने बताया कि चावेज को 74 लाख यानी 54% से ज्यादा वोट मिले, जबकि कैप्रिल्स को लगभग 61 लाख यानी करीब 45% वोट मिले।
चावेज अगले 6 साल के लिए राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने विदेश मंत्री मादुरो को अपना उपराष्ट्रपति बनाया। 2 ही महीने बाद चावेज की तबीयत फिर बिगड़ गई। 8 दिसंबर को उन्होंने मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और फिर उन्हें कैंसर की चौथी बार सर्जरी के लिए क्यूबा जाना पड़ा।

8 दिसंबर 2012 को विदेश मंत्री निकोलस मादुरो को अपना वारिस घोषित करते राष्ट्रपति चावेज।
प्लेन पर चढ़ते हुए चावेज ने लोगों को फ्लाइंग किस दी। फरवरी 2013 में सरकार ने कहा कि चावेज वेनेजुएला लौट आए हैं और कराकस के मिलिट्री हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है। हालांकि इसके बाद उन्हें सार्वजानिक तौर पर कभी नहीं देखा गया। 5 मार्च 2013 को उनकी मौत की खबर आई।
वेनेजुएला के संविधान के मुताबिक, अगर राष्ट्रपति 6 साल के कार्यकाल में से 4 साल तक किसी वजह से पद पर न रहें, तो 30 दिन के अंदर नए चुनाव कराने होंगे।
PSUV की तरफ से मादुरो ही राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। उन्होंने चुनाव के लिए नामांकन करवाते समय कहा, ‘मैं चावेज नहीं हूं, लेकिन उनका बेटा हूं।’ उनकी चुनावी रैलियों में लाउडस्पीकरों से चावेज की आवाज में गाया हुआ वेनेजुएला का राष्ट्रगान गूंजता था। एक रैली में मादुरो ने कहा, ‘चावेज मुझे एक छोटी चिड़िया की तरह दिखे और उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे साथ हूं।’
अप्रैल 2013 में चुनाव हुए। इलेक्शन काउंसिल ने 50.8% वोट के साथ मादुरो को विजेता घोषित किया। जबकि उनके खिलाफ लड़े हेनरिक कैप्रिल्स को 49% वोट मिले। कैप्रिल्स ने PSUV पर वोटों की गिनती में गड़बड़ी करवाने का आरोप लगाया। PSUV के ट्विटर अकाउंट को हैक करके उसमें PSUV पर ही चुनावी धांधली का आरोप लगाया गया। हालांकि मादुरो और PSUV ने इन आरोपों से इनकार कर दिया।

15 अप्रैल 2013 को मादुरो राष्ट्रपति बने, जबकि चावेज की सरकार में मंत्री और चावेज की बेटी रोजा वर्जीनिया के पति जॉर्ज अरेजा उप राष्ट्रपति बने।
वेनेजुएला के कानून के हिसाब से वहां जन्मा व्यक्ति ही देश का राष्ट्रपति बन सकता है। मादुरो की मां का जन्म और उनके माता-पिता की शादी कोलंबिया में होने के कारण विपक्षियों ने उनके राष्ट्रपति बनने पर आपत्ति जताई। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और 2016 में कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मादुरो का जन्म कोलंबिया में नहीं, बल्कि कराकस में ही हुआ है।
विपक्ष ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए
इसके बाद तीन और राष्ट्रपति चुनावों में मादुरो की जीत हुई। हर बार विपक्षी दलों ने चुनावों में धांधली और गैरकानूनी तरीके से सत्ता हथियाने का आरोप लगाया।
2018 के चुनाव में मादुरो के खिलाफ जुआन गुआइदो विपक्षी उम्मीदवार थे। तब अमेरिका सहित 50 से ज्यादा देशों ने जुआन गुआइदो को वेनेजुएला के राष्ट्रपति के बतौर मान्यता दी, लेकिन वेनेजुएला पर मादुरो का ही शासन चलता रहा।
वेनेजुएला की विपक्षी नेता और 2025 में नोबेल पीस प्राइज जीतने वाली मारिया मचाडो चावेज और मादुरो के दौर में सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रही थीं।
मारिया का ऑर्गेनाइजेशन ‘सुमाते’ देश में निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग के लिए प्रदर्शन करता था। ‘सुमाते’ को लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाले अमेरिकी संगठन नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (NED) से लाखों डॉलर की फंडिंग मिलती रही है।
2002 में सुमाते के बैनर तले मारिया ने चावेज के भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोला, जिसके चलते उन पर देशद्रोह का आरोप लगा। कहा गया कि एलीट क्लास से आने वाली मारिया जॉर्ज बुश यानी तब के अमेरिकी राष्ट्रपति के इशारे पर काम कर रही हैं।
मई 2005 में मारिया बुश से मिलीं और उन्होंने खुद बताया कि एक लाख डॉलर की रकम मिली है। इसके बाद मारिया, चावेज की सरकार के निशाने पर आ गईं। तबसे उनके दो बेटे और एक बेटी अमेरिका में ही रहते हैं। बीते दिनों ऑस्लो में उनका नोबेल लेने उनकी बेटी ही पहुंची थीं।
2023 में मारिया राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन अयोग्य घोषित कर दिया गया। उनकी जगह एडमंडो गोंजालेज विपक्ष से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने। शासन ने मारिया की उड़ानों पर बैन लगा दिया, तो मारिया ने एडमंडो के लिए पूरे देश में पैदल चुनाव प्रचार किया।

2024 में मारिया वेनेजुएला में अचानक एक ट्रक से आकर भाषण देतीं और भाषण के बाद मोटरसाइकिल से निकल जाती थीं।
2024 के चुनाव में भी मादुरो चुनाव में धांधली करके राष्ट्रपति बने, जबकि यूरोपियन यूनियन और कई अन्य देशों ने एडमंडो गोंजालेज को राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता दी। चुनाव हारने के बाद गोंजालेज को धमकियां मिलने लगीं, तो वे स्पेन चले गए। जबकि मारिया वेनेजुएला में ही रहती रहीं। मादुरो की पुलिस द्वारा गिरफ्तार होने के डर से मारिया छिपी रहती थीं।

मादुरो पर 2018 से लेकर 2024 तक तीन बार जानलेवा हमले हुए…

वेनेजुएला की सेना ने कहा कि असफल तख्तापलट के बाद उसने भाड़े के सैनिकों को पकड़ लिया है।

अमेरिका, कभी वेनेजुएला से तेल खरीदता रहा है, लेकिन ह्यूगो चावेज के दौर से अमेरिका पर वेनेजुएला की अंदरूनी राजनीति में दखल देने के आरोप भी लगते रहे। 2002 में ह्यूगो का तख्तापलट करने की कोशिश हुई, इसमें अमेरिका का नाम आया। मादुरो के दौर में अमेरिका वेनेजुएला को लेकर और सख्त हो गया। 2017 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर कई बैन लगाए। 2019 से अमेरिका मादुरो को वेनेजुएला का राष्ट्रपति नहीं मानता है। इसी साल अमेरिका ने मादुरो को नार्को-टेररिस्ट यानी अवैध ड्रग्स का धंधा करने वाला आतंकी करार देकर उन पर इनाम रखा था। इसी साल ट्रम्प ने इनाम की रकम दोगुनी कर दी थी।
अमेरिका ने मादुरो पर आरोप लगाए कि वह ड्रग तस्करी में शामिल हैं। बीते कुछ महीनों में अमेरिकी नेवी और एयरफोर्स के जवानों ने वेनेजुएला से आने वाले जहाजों पर करीब 25 हमले किए। इनमें कम से कम 90 लोगों की मौत हुई। मारिया ने इस कार्रवाई की तारीफ करते हुए कहा कि ये वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए जरूरी है। ये गिरोह अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

वेनेजुएला के पास समुद्र में कच्चे तेल के टैंकर पर कब्जा करते अमेरिकी कमांडो।
अमेरिकी सेना तेल ले जाने वाले जहाजों पर हमले कर रही थी, जबकि ट्रम्प का कहना था कि वेनेजुएला से अमेरिका में फेंटानिल और कोकीन जैसे ड्रग्स भेजे जा रहे हैं। ट्रम्प ने वेनेजुएला के दो गैंग – ‘ट्रेन दे अरागुआ’ और ‘कार्टेल दे लोस सोलेस’ को आतंकी संगठनों की लिस्ट में डाल दिया था। साथ ही ये भी कहा था कि ‘लोस सोलेस’ के लीडर खुद मादुरो हैं।
जबकि ‘कार्टेल दे लोस सोलेस’ किसी गैंग लीडर के जरिए संचालित होने वाला कोई संगठित गिरोह नहीं है। बल्कि ये शब्द व्यापक तौर पर उन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए इस्तेमाल होता है, जो कोकीन को वेनेजुएला के रास्ते गुजरने देते हैं। हालांकि मादुरो का कहना था कि अमेरिका ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ को बहाना बनाकर उन्हें सत्ता से हटाना चाहता है और वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा करना चाहता है।
ड्रग्स के मामलों के एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि वेनेजुएला पूरी दुनिया में ड्रग तस्करी का काफी छोटा खिलाड़ी है। ये एक ट्रांजिट देश की तरह काम करता है। यहां से दूसरे देशों में बनी ड्रग्स की तस्करी होती है।
JNU में इंटरनेशनल स्टडीज के प्रो. अमिताभ सिंह कहते हैं, ‘अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल के भंडार पर है। वह लंबे समय से वेनेजुएला में विपक्ष की सबसे बड़ी नेता और नोबेल पुरस्कार जीतने वाली मारिया मचाडो को सत्ता में लाना चाहता था, जिससे वो वेनेजुएला की सत्ता पर कंट्रोल कर सके।’
ट्रम्प भी मारिया को वेनेजुएला के विपक्ष का चेहरा मानते रहे। जनवरी 2025 में मादुरो वेनेजुएला तीसरी बार वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले थे। मारिया अगस्त 2024 से छिपी हुई थीं, लेकिन उन्होंने मादुरो के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इस पर ट्रम्प ने उन्हें ‘फ्रीडम फाइटर’ कहते हुए उनकी सुरक्षा की मांग की थी। अमेरिका ने मारिया को राजनीतिक शरण देने की भी बात कही।

नोबेल पीस प्राइज मिलने के बाद ऑस्लो के एक होटल से समर्थकों का अभिवादन करतीं मारिया मचाडो।
रणनीतिक तौर पर मारिया भी अमेरिका और ट्रम्प की तारीफ करती हैं। 2024 में ट्रम्प ने जब दोबारा राष्ट्रपति चुनाव जीता, तो मारिया ने उन्हें जीत की बधाई देते हुए X पर लिखा था, ‘हम हमेशा आप पर भरोसा करते हैं। अमेरिका का लोकतंत्र वेनेजुएला के लिए प्रेरणा है।’
अब मादुरो को पकड़ने के बाद ट्रम्प ने कहा है कि फिलहाल यह साफ नहीं है कि वेनेजुएला का अगला नेता कौन होगा। जब तक वहां हालात पूरी तरह ठीक नहीं हो जाते और सत्ता का सही तरीके से बदलाव नहीं हो जाता, तब तक वेनेजुएला की जिम्मेदारी अमेरिका अपने हाथ में रखेगा। ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका अभी वेनेजुएला को चलाएगा। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि मादुरो सरकार किसी दूसरे नेता के जरिए दोबारा सत्ता में बनी रहे। उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था को नए चेहरे के साथ जारी रखने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
जानकारों का कहना है कि मादुरो को ट्रम्प ने आतंकवादियों की लिस्ट में डाला हुआ है। ऐसे में उन्हें लंबे समय के लिए जेल में डालकर मुकदमा चलाया जा सकता है। वहीं वेनेजुएला में मारिया अमेरिका की मदद से विपक्ष के नेताओं को साथ लेकर चुनाव करवा सकती हैं।