दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी आर्सेलर मित्तल के मालिक और ब्रिटेन के टॉप अरबपतियों में शामिल लक्ष्मी मित्तल ब्रिटेन छोड़ रहे हैं।
द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लेबर पार्टी की नई सरकार द्वारा अमीरों पर टैक्स बढ़ाने की तैयारी के चलते मित्तल ने यह फैसला लिया है। भारतवंशी मित्तल की कुल संपत्ति करीब 1.8 लाख करोड़ रुपए है। वे ब्रिटेन के आठवें सबसे अमीर व्यक्ति हैं।
20% का ‘एग्जिट टैक्स’ लगाने की तैयारी में ब्रिटेन
लेबर पार्टी की सरकार में वित्त मंत्री रेचल रीव्स देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए 20 अरब पाउंड (करीब 2.3 लाख करोड़ रुपए) का फंड जुटाने की कोशिश कर रही है।
26 नवंबर को रेचल रीव्स का बजट आना है। अटकलें हैं कि इसमें 20% तक एक्जिट टैक्स लगाने का ऐलान हो सकता है। इससे पहले सरकार ने कैपिटल गेन टैक्स को अप्रैल 2025 से 10% से बढ़ाकर 14% कर दिया था। 2026 में ये 18% तक पहुंच जाएगा।
मित्तल के परिवार के एक सलाहकार ने कहा कि सबसे बड़ी चिंता इनहेरिटेंस टैक्स (विरासत कर) है। ज्यादातर अमीर विदेशी लोग ये समझ ही नहीं पाते कि उनकी दुनिया भर की संपत्ति पर ब्रिटेन का इनहेरिटेंस टैक्स क्यों लगना चाहिए? ये देश छोड़ने पर मजबूर कर रहा हैं।
ब्रिटेन में इनहेरिटेंस टैक्स 40% तक लगता है। दुबई में ये जीरो है। अप्रैल में नॉन-डॉम स्टेटस खत्म करने के बाद कई अमीर लोगों ने ब्रिटेन छोड़ने का फैसला किया। ये पुराना सिस्टम (200 साल पुराना) अमीर लोगों को सिर्फ ब्रिटेन में कमाई पर टैक्स देने की सुविधा देता था।

26 नवंबर को रेचल रीव्स का बजट आना है। अफवाहें हैं कि और टैक्स बढ़ोतरी हो सकती है।
दुबई या स्विट्जरलैंड में नया बेस बना सकते हैं मित्तल
मित्तल की पहले से ही दुबई में एक आलीशान हवेली हैं। खबरों के मुताबिक UAE के ना आइलैंड पर उन्होंने जमीन भी खरीद ली है। दुबई और स्विट्जरलैंड अमीर लोगों में इसलिए पॉपुलर हो गए हैं क्योंकि वहां इनहेरिटेंस टैक्स (विरासत कर) बिल्कुल नहीं लगता।
यही वजह है कि दुनिया भर के बड़े-बड़े परिवार वहां शिफ्ट हो रहे हैं। मित्तल का ये फैसला ऐसे वक्त में आया है जब ब्रिटेन से कई बड़े उद्यमी और निवेशक पलायन कर रहे हैं। वजह है वहां की पॉलिसी में स्थिरता की कमी और आने वाले समय में टैक्स बढ़ने की आशंका।
ब्रिटेन की इकोनॉमी को नुकसान हो सकता है
यह कदम ब्रिटेन की सरकार के लिए परेशानी है, क्योंकि मित्तल जैसे लोग न सिर्फ टैक्स देते हैं, बल्कि नौकरियां और निवेश भी लाते हैं। लेबर पार्टी की यह नीति अमीरों को ब्रिटेन छोड़ने का खतरा पैदा कर रही है। ऐसे में कई ग्लोबल बिजनेसमैन ब्रिटेन छोड़ने की सोच रहे हैं।
सरकार का मकसद कर्ज चुकाना और वेलफेयर योजनाओं को मजबूत करना है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि इससे ब्रिटेन की इकोनॉमी को नुकसान हो सकता है।
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